मांस खाना बहुत ही गलत है यह एक हिंसा का रूप है जो कि व्यक्ति को गलत राह पर लेकर जाता है लोग मांस जीवो की हत्या करके खाते हैं तथा जीव हत्या करना परमात्मा का आदेश नहीं है जीव हत्या एक महापाप है ।वेदों व शास्त्रों में कहीं भी नहीं लिखा है कि व्यक्ति को जीव की हत्या करके मांस खाना चाहिए अर्थात व्यक्ति को मास नहीं खाना चाहिए यह बिल्कुल गलत है जो मांस खाता है उसको कोई गति प्राप्त नहीं होती है। उसको मोक्ष प्राप्त नहीं होता है उसे 8400000 योनियों भोगनी पड़ती है।

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बाईबिल

जन्माष्टमी

प्राकृतिक आपदा प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने के कारण होती है प्राकृतिक आपदाएं मानवो को बहुत नुकसान पहुंचाती है तथा सामाजिकता तथा घरों को भारी हानि पहुंचाती है ।प्राकृतिक आपदा हम मनुष्य के कारण होती है क्योंकि प्रकृति का कई तरीकों से मनुष्य ने दोहन किया जिसे प्रकृति का संतुलन बिगड़ा और प्राकृतिक आपदाएं आनी शुरू हो गई। प्राकृतिक आपदा मनुष्य के लिए बहुत ही हानिकारक व दर्दनाक है ।प्राकृतिक आपदाओं से मनुष्य के घरों तथा कई तरीकों के नुकसान होते हैं ,कई मनुष्य बेघर हो जाते हैं ।जो लोग प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन तथा उन को हानि पहुंचाते हैं वह व्यक्ति बहुत ही गलत होते हैं तथा वह गलत कर रहे होते हैं ।सही तरीके से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना तथा प्रकृति के प्रति मानसिकता को बदलने के लिए कई तरीकों का प्रयोग किया जा सकता है। हम आध्यात्मिक ज्ञान सुनकर भी प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने से पीछे हट सकते हैं ।अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें संत रामपाल जी महाराज का सत्संग 7:30 से 8:30 साधना टीवी पर