पर्यावरण जिसके बीच हम रह रहे हैं जिससे हम जीवित हैं ।एक ऐसी संरचना ऐसी संकल्पना जिसके बिना हमारा जीवन संभव नहीं है हम मनुष्य ऐसे हैं जो पर्यावरण को बना भी सकते हैं तथा उसे बिगाड़ भी सकते हैं। पर्यावरण से हमें कई प्रकार के संसाधन प्राप्त होते हैं जो कि हमारे लिए अति आवश्यक होते हैं। कई मनुष्य द्वारा इस पर्यावरण को दूषित प्रदूषित भी किया जा रहा है जिससे हम मनुष्य को ही भविष्य में तकलीफें उठानी पड़ेगी जिस से आने वाली पीढ़ियां परेशानियों से ग्रस्त रहेगी तथा बीमार रहेगी ।कई लोग धुम्रपान करके इस पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। धूम्रपान जिससे करने वाले को भी बीमारियां होती है तथा जो भी व्यक्ति उसकी धुआँ के संपर्क में आता है वह व्यक्ति भी बीमारियों के शिकार हो जाता है। धुम्रपान की धुआँ बहुत ही जहरीली होती है जो कि पर्यावरण के कई कारकों को नष्ट करती है। हम इस पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं सभी जो भी व्यक्ति धूम्रपान करता है उन व्यक्तियों को इस धूम्रपान को छोड़ने की सलाह देकर पर्यावरण के जो कारक नष्ट हो रहे हैं उन को नष्ट होने से बचा सकते हैं पर्यावरण को पहले जैसा वापस बना सकते हैं हम पर्यावरण को लोगों को सलाह देकर स्वच्छ बना सकते हैं। पर्यावरण ही एक ऐसा घटक है जिससे हम मनुष्य जीवित रह सकते हैं तथा इस पृथ्वी पर रह सकते हैं अर्थात पर्यावरण के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है कई लोगों का धूम्रपान छुड़वाने में कई लोग सहायता कर रहे हैं जो व्यक्ति धूम्रपान को छोड़ना चाहते हैं वे उसे त्यागना चाहते हैं लेकिन वह उसे छोड़ नहीं पा रहे हैं।अगर ऐसा कई लोगों के साथ हो रहा है तो अवश्य सुनिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सत्संग साधना टीवी पर शाम 7:30 से 8:30 बजे तक

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प्राकृतिक आपदा प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने के कारण होती है प्राकृतिक आपदाएं मानवो को बहुत नुकसान पहुंचाती है तथा सामाजिकता तथा घरों को भारी हानि पहुंचाती है ।प्राकृतिक आपदा हम मनुष्य के कारण होती है क्योंकि प्रकृति का कई तरीकों से मनुष्य ने दोहन किया जिसे प्रकृति का संतुलन बिगड़ा और प्राकृतिक आपदाएं आनी शुरू हो गई। प्राकृतिक आपदा मनुष्य के लिए बहुत ही हानिकारक व दर्दनाक है ।प्राकृतिक आपदाओं से मनुष्य के घरों तथा कई तरीकों के नुकसान होते हैं ,कई मनुष्य बेघर हो जाते हैं ।जो लोग प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन तथा उन को हानि पहुंचाते हैं वह व्यक्ति बहुत ही गलत होते हैं तथा वह गलत कर रहे होते हैं ।सही तरीके से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना तथा प्रकृति के प्रति मानसिकता को बदलने के लिए कई तरीकों का प्रयोग किया जा सकता है। हम आध्यात्मिक ज्ञान सुनकर भी प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने से पीछे हट सकते हैं ।अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें संत रामपाल जी महाराज का सत्संग 7:30 से 8:30 साधना टीवी पर